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बचपन और बचपना

बचपन और बचपना एक मायावी समय हर व्यक्ति के जीवन का जब वो इस दुनिया में होता तो है,...

मासूमियत

एक आस थी, एक आस है|   एक आरजू थी, एक है आशाओं से भरा है समां बस कमी...

Disappointed

A fictitious verse in which a person talks to his beloved friend to know the reason of his disappointments,...

बहुत याद आते हैं

बहुत दिनों के बाद कुछ लिखने का प्रयास किया है, उतना उभर के भाव आ तो नहीं सके, परंतु...
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In reality, the friend who always answers our calls, the barista who doubles as our therapist, and the co-worker who invited us out during our first crushingly lonely week in a new city can feel as much like our family as the clan we’re born into.

Balancing a composition involves arranging both positive elements and negative space in such a way that no one area of the design overpowers other areas. Everything works together and fits together in a seamless whole. The individual parts contribute to their sum but don’t try to become the sum.
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With the master

‘Rahat Indori’

ज़ुबाँ तो खोल, नज़र तो मिला, जवाब तो दे|

तेरी खामोशी बेशक बयां करती तेरी नाराजगी,

पर ए दोस्त,

ए मित्र

हमसे भूल क्या हुई ये तो बताते जा|

इस ख़ामोशी के सन्नाटे में जैसे पागल सा हो रहा मैं,

मेरी ग़लती,

मेरी गुस्ताखी बताके तो जा|

ज़ुबाँ तो खोल, नज़र तो मिला, जवाब तो दे|

तू है, तो जैसे तैसे मेरे दिन-रात कट जाते है,

बातों में, खेलों में,

आपसी उल्लहास में|

तेरी अनचाही खामोशी

ने मुझे निराशाजनक स्थिति में दाल दिया है

अब मान भी जा और मुस्कुरा दे जरा

ज़ुबाँ तो खोल, नज़र तो मिला, जवाब तो दे|

childhood memories
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बचपन और बचपना

बचपन और बचपना

एक मायावी समय

हर व्यक्ति के जीवन का

जब वो इस दुनिया में होता तो है,

पर उसकी पीड़ा, उसके असलियत से कोसों दूर|

 

एक छद्म में वो जीता है,

और वह इसलिए क्योंकि

वास्तविकता से वह अनजान है|

 

पर आप,

मैं, और

हम सभी इस बेला को

महसूस कर चुकें हैं|

जानते है उस अनजानेपन में जो सुख है

उससे अच्छा और सरल कुछ भी नहीं|

 

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बचपन,

क्या कहने रे तेरे|

तू जानता नहीं कि तू कितना गुणी है

कितना समझदार, कितना चतुर है|

 

तेरा समय जब भी किसी के जीवन में

आता है,

तो वह बहुत खुश,

मज़े में, हँसता- खेलता,

जिम्मेदारियों से कोसों दूर,

आराम से रहता है|

 

न पढ़ाई की चिंता,

न किसी और चीज़ की|

माँ के ममता के छाव में सोया रहता,

एक अलग ही सपनोँ की से दुनिया में जीता|

 

पर वक्त तो कब किसके लिए रुका है

तो तू भी चले जाता|

पर तेरा भाव(बचपना)

तो ऐसा है,

कि कभी- कभी नहीं जाता,

और वही शायद तेरी यादें ताज़ा कर जाती है|

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Love, Poems

मासूमियत

एक आस थी,

एक आस है|

 

एक आरजू थी, एक है

आशाओं से भरा है समां

बस कमी है तो तेरी|

 

तुझसे तारुफ़ तो है मेरा,

पर समय-समय पर

तक़ल्लुफ़ कि आवश्यकता फिर क्यों?

 

तू है पास,

तेरा एहसास है मुझे,

मुझमें,

तुझमें,

पर तेरे अनजानेपन

और मासूमियत

के कारण,

तुझे कुछ भी दिखाई नहीं देता|

 

तेरा इंतज़ार करते-करते

थक चूका हूँ मैं,

पर तेरी अच्छाई और तेरा

बचपना,

तेरी हँसी,

तेरी अठ्खेलियाँ

मुझे तुझसे अलग होने ही नहीं देती|

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Poems

Disappointed

A fictitious verse in which a person talks to his beloved friend to know the reason of his disappointments, but still is worried about the state of their company.

Why are you so disappointed in me, my friend?

Why?

Your disappointment with the hint of chagrin

constantly irks me.

 

It makes me feel that I am of no use to you.

Then, what for we are friends?

To fake everyone,

but then too for what purpose?

 

I just don’t understand.

You, my friend,

I don’t know what are you trying.

To test my friendship fidelity or ferociousness,

Always letting me down.

 

I tried offering you the olive branch,

hoped to have the candour,

the camaraderie between…

but everything in vain.

 

But still, I will not lose hope on you

for you have taught me a lot

in senses and not so good stances.

I will be there for you whenever you need,

at least try to be,

even if you have failed in me.

 

 

 

 

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Poems

बहुत याद आते हैं

बहुत दिनों के बाद कुछ लिखने का प्रयास किया है, उतना उभर के भाव आ तो नहीं सके, परंतु फिर भी आशा और उम्मीद के साथ आपके लिए प्रस्तुत है वो कुछ यादें जो दोस्त दूर हो जाने के बाद भी नहीं भूलते|

 

ए मेरे दोस्त,

तेरे साथ गुज़ारे वो पल

बहुत याद आते हैं|

 

मुझे याद आता है ,

मेरा यूँ  दिन भर

बकर-बकर

करते रहना…

छोटी-छोटी-सी बातों पे रूठना,

फिर तेरा मुझे हर समय अनदेखा करना|

 

तू बहुत अच्छा था यार मेरे,

हर समय हँसता और हँसाता रहता

खुद दुखी होकर भी पता नहीं लगने देता|

 

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जब भी मैं बीमार पढ़ता,

मेरी देखभाल करता

मेरे बड़े भाई साहब जैसे|

 

बहुत याद आते हैं

वो पल जब मैं भाव- विह्वल होता,

बैचैन सा महसूस करता

तो तू मुझे दिलासा देता |

 

वो समय तो अब कहाँ चले गया

बस यादों में ही सिमट-से  गए हैं

और कुछ समय में विस्मृतियों की तार में शामिल हो जायेगा,

पर फिर भी मैं अंत में कहूँगा

कि वो यादें बहुत याद आते हैं||

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Poems

असमंजस

असमंजस

आशा है, अभिलाषा भी है

आस है किसी चीज़ की,

किसी की|

स्थिति पल-पल की है, गंभीर

असमंजस में,

उससे,

उसी में|

पर उसी असमंजस  का सामंजस्य बैठना और बैठना

ये ही तो है

एक दिन का सरल, सुलभ समापन होना|

  मृणाल…

रचना – ३१ जन, २०१६

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Love, Poems, Thoughts and Quotable quotes

इंतज़ार

इंतज़ार थी मुझे तेरी,

कि तू ए हमसफ़र मेरे, आएगा

मुझसे मिलने, पास, पार्श्व करवाएगा

मेरे दिल-ओ-दिमाग़ में बसे बेचैनियों को|

तू आया तो सही, पर अब वो जो तू था,

तू नहीं रहा, रह गया तो सिर्फ़ तेरी वो

शक्ल और बदन जिससे में जाना तो हुआ था,

मिला हुआ था, महसूस किया हुआ था

पर जहन किसी और की ही थी

जिससे में बिलकुल अनजान था|

अब तो बस इंतज़ार, इंतज़ार

और इंतज़ार ही रह गया है

कतार सी पंक्तियाँ का सरमोर हो गया है|

 

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Poems, Thoughts and Quotable quotes

हासिल

हासिल क्या होना था इस जहान-ए-गम में
हुआ तो बहुत कुछ
जो मैंने,
तुमने,
हम सबने समझा और माना
पर इस विस्मृति की स्मृति बाद में ही आई
कि ले जाना नहीं था कुछ भी|
reaching-for-star-big
Translation
‘Procuring’
What have you obtained from this world full of sorrows,
endorsed with it,
enveloped with it…
Procurement has been a lot,
in person singularly,
by you,
by us all together in unison,
understanding and considering the pros and cons
of our act in order.
But the reminisce of this oblivion came only after,
which hitherto never have had reflected.
The truth it was
a harsh but honest one
of having whatever you can,
but taking in return
while going way away
nothing
is no matter of consideration,
as away is far and fathomlessly different
and this world offers in return nothing,
as you had arrived also with nothing
empty-handed, bare, naked.

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